या अल्लाह हमारी मदद कर तेरी अच्छी इबादत करने में


या अल्लाह हमारी मदद कर तेरी अच्छी इबादत करने में

अल-क़ुरआन: “और जो अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हो जाता है तो हम उस पर एक शैतान मुक़र्रर कर देते हैं फिर वो उसका साथी बन जाता है

(सूरह अज़-ज़ुखरुफ़ (43): आयत (36)


दुआ: “अल्लाहुम्मा इन्नी अला ज़िक्रीका वा शुक्रका वा हुस्नी इबादतीका”


(तर्जुमाः) या अल्लाह मेरी मदद कर तेरा ज़िक्र करने में और तेरा शुक्र अदा करने में और तेरी अच्छी इबादत करने में)


सुनन अबू दाउद, वॉल्यूम 1, 1509 ( सहीह)


सुभानल्लाही वा बिहम्दिहि, सुभान-अल्लाहिल-अज़ीम ला इलाहा इल्लल्लाहु, वह्दहू ला शरीका लहू, लाहुल मुल्कु, वा लाहुल हम्दु, वा हुवा अला कुल्ली शैईन क़दीर”


अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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